शुक्रवार, 12 मार्च 2010

वेदना के गीत

वेदना के राग गाने को मिले स्वर साधना के ,
गीत तेरी वन्दना के मीत कैसे गा सकूंगी !

यामिनी ने फूल की सेजें बिछाईं
पा उपेक्षा चाँद की मुरझा गयी हैं ,
चाँदनी ने हर्ष की मणियाँ लुटाईं
ओस बन सारी धरा पर छा गयी हैं !
इस अमावस की अंधेरी रात में ओ रे अपरिचित
पंथ तेरे द्वार आने का कहाँ से पा सकूँगी !
गीत कैसे गा सकूँगी !

कामना की अनखिली कलियाँ लुटा कर
विरस पतझड़ में अकेली मैं खड़ी हूँ ,
देख कर विश्वास का मृगजल सुहाना
अधर सूखे तृप्त करने को अड़ी हूँ !
ले गयी हैं छीन कर मुस्कान पौधों की बहारें
फूल तेरी अर्चना को मैं कहाँ से पा सकूँगी !
गीत कैसे गा सकूँगी !

किरण