रविवार, 13 जून 2010

ज्योतिकण

कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

कौन सी वह है सुहागन देव का जो ध्यान धरती,
गगन गंगा में पिया हित दीप का जो दान करती,
छूट कर उसके करों से जो उमड़ते आ रहे हैं !
कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

आज किसने गा दिया है राग दीपक मधुर स्वर भर,
जल गए जो स्वर्ग के दीपक सलोने सभी चुन कर,
चमचमाते नील प्रांगण में सभी को भा रहे हैं !
कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

कौन दीपावलि सजा कर कर रहे हैं ध्यान किसका,
कौन सी वह लक्ष्मी है कर रहे आह्वान जिसका,
इस अमा की रात्रि में जो शून्य जग चमका रहे हैं !
कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

कौन सी दुखिया बहाती नयन से अविराम मोती,
चन्द्र की छा प्रभा जिन पर भर रही है अमर ज्योति,
किस अभागन के ह्रदय के घाव ये दिखला रहे हैं !
कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

चाँदनी के नयन मुक्ता हैं धरा के घाव उर के,
साँध्य सुंदरि दीप धरती शशि रमा का ध्यान धरते,
वे नियंता चतुर गायक राग दीपक गा रहे हैं !
कौन के अरमान नभ में ज्योतिकण बन छा रहे हैं !

किरण