शनिवार, 27 नवंबर 2010

मुझको ऐसे गीत चाहिये

मुझको ऐसे गीत चाहिये !
जो पतझड़ में मधुॠतु ला दे
मुझको वह संगीत चाहिये !

मुझको ऐसे गीत चाहिये !

जो चुन लायें श्रम के मोती,
जो वर लायें जीवन ज्योति,
जो चेतायें दुनिया सोती,
मुझको ऐसे मीत चाहिये !

मुझको ऐसे गीत चाहिये !

जो झोली भर दे दीनों की,
आहें छीने आधीनों की,
हों झंकृत तानें बीनों की,
मुझको ऐसी प्रीत चाहिये !

मुझको ऐसे गीत चाहिये !

दुखियों के अरमान दिला दे,
जीवन के वरदान दिला दे,
मर मिटने का मान दिला दे,
मुझको ऐसी जीत चाहिये !

मुझको ऐसे गीत चाहिये !

किरण