शुक्रवार, 20 मई 2011

कृष्णागमन















चित्रकार तूलिका उठाओ !
जैसा-जैसा कहूँ आज मैं वैसा चित्र बनाओ !
चित्रकार तूलिका उठाओ !

एक अँधेरा भग्न भवन हो ,
हर कोने में सूनापन हो ,
जिसमें इक दुखिया बैठी हो ,
नयन नीर नदिया बहती हो !

ऐ गुणीवर उसकी स्वासों से
करुणा जल बिखराओ !
चित्रकार तूलिका उठाओ !

तन पर फटी हुई हो सारी ,
गीली, अश्रु नीर से भारी ,
हाथों में हथकड़ी पड़ी हो ,
बेड़ी पैरों बीच अड़ी हो !

रह-रह दीर्घ श्वांस ले-लेकर
कहती हो, 'ऐ प्रभु आओ' !
चित्रकार तूलिका उठाओ !

चित्रकार फिर यह दिखलाना ,
सूने घर में ज्योति जगाना ,
चौंक अचानक पड़ना उसका ,
दौड़ अचानक पड़ना उसका !

मृदु मराल गति आते हँसते
मुरलीधर दिखलाओ !
चित्रकार तूलिका उठाओ !


किरण
चित्र गूगल से साभार