शनिवार, 25 सितंबर 2010

* मैंने कितने दीप जलाए *

कितने दीप जलाये मैंने कितने दीप जलाये !

मेरे स्नेह भरे दीपक थे,
सूनी कुटिया के सम्बल थे,
मैंने उनकी क्षीण प्रभा में
अगणित स्वप्न सजाये !

मैंने कितने दीप जलाए !

आँचल से उनको दुलराया,
तूफानों से उन्हें बचाया,
मेरे अँधियारे जीवन को
ज्योतित वो कर पाये !

मैंने कितने दीप जलाये !

अंधकार रजनी की बेला,
नभ पर है तारों का मेला,
उनसे तेरा मन ना बहला
मेरे दीप चुराये !

मैंने कितने दीप जलाये !

तूने क्या इसमें सुख पाया,
मेरे आँसू पर मुसकाया,
निर्मम तुझको दया न आई
मेरे दीप बुझाये !

मैंने कितने दीप जलाये !

किरण