गुरुवार, 16 सितंबर 2010

* नाव न रोको *

साथी मेरी नाव न रोको !

चली जा रही अपने पथ पर
डग-मग बहती हिलती डुलती,
इस चंचल उत्फुल्ल सरित पर
इठलाती कुछ गाती चलती,

मेरी मंजिल दूर, देव मुझको
जाने दो, अब मत रोको !
साथी मेरी नाव न रोको !

सह न सकेगा यह उर यह सुख
हर न सकेगा प्राणों का दुःख,
मेरे जीवन के पथ पर सम
कैसा दुःख और कैसा प्रिय सुख,

मेरी अमर अश्रुओं की निधि
मत छीनो, मुझको मत रोको !
साथी मेरी नाव न रोको !

मैं बहती हूँ , बहने दो प्रिय
मैं सहती हूँ, सहने दो प्रिय,
मेरी भग्न हृदय कुटिया को
यदि सूना तुम छोड़ सको प्रिय,

तो जाओ, आबाद रहो तुम
मेरा शाश्वत पंथ न रोको !
साथी मेरी नाव न रोको !

किरण