शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

शतश: प्रणाम


ओ आज़ादी के दीवानों , ओ स्वातंत्र्य युद्ध के वीरों ,
ओ रणचण्डी के खप्पर को भरने वाले रणवीरों !

देकर तन मन धन की आहुति जीवन यज्ञ रचाने वालों ,
अपने दृढ़ निश्चय के दीपक जला पंथ दिखलाने वालों !

बने नींव के पत्थर पल क्षण अपनी भेंट चढ़ाने वालों ,
विजय दुर्ग की प्राचीरों को दृढ़ करने वाले मतवालों !

ओ भारत के कोहेनूर गाँधी बाबा तुमको प्रणाम ,
ओ अमर शहीदों भक्तिपूर्ण तुमको प्रणाम शतश: प्रणाम !


किरण