मंगलवार, 6 सितंबर 2011

सखी युग ने करवट बदली

सखी युग ने करवट बदली !

आज नया यह पुण्य प्रभात ,
आज प्रफुल्लित है उर गात ,
घटा शोक, संताप, विषाद ,
छाया सुखद मधुर आल्हाद ,
भाग्य सूर्य भारत का चमका फटी दुखों की बदली !
सखी युग ने करवट बदली !

आज हमारा सच्चा देश ,
आज हमारा सच्चा वेश ,
दूर हुआ सब कोढ़ कलंक ,
मिटा व्यर्थ का भय आतंक ,
भारत के निर्मल सागर से हटी सरित वह गँदली !
सखी युग ने करवट बदली !

आओ मंगल साज सजें सखि ,
घर-घर मंगल वाद्य बजें सखि ,
दूर करें ईसा सम्वत्सर
नव सम्वत्सर आज लिखें सखि ,
पूजें विजय देवी हर्षित हो चढ़ा आम्रफल कदली !
सखि युग ने करवट बदली !

किरण