शनिवार, 17 सितंबर 2011

उत्कण्ठा


आज प्रिय घर आयेंगे !
प्राण प्रमुदित हैं सखी प्रियतम सुदर्शन पायेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !

नयन निर्झरिणी उमड़ कर यह प्रकट करती रही कि ,
आज अपने प्राणधन पर हम ही अर्ध्य चढ़ायेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !

हृदय उपवन में सखी मन मालि चुन कर पुष्प मृदु ,
सोचता यह हार गुँथ कर हम उन्हें पहनायेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !

कह उठे कर आज सेवा करके हम होंगे सफल ,
पैर बोले आज स्वागत को प्रथम हम जायेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !

कहा जिह्वा ने कि स्तुति करके होऊँ धन्य मैं ,
कर्ण बोले शब्द उनके सुनके हम सुख पायेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !

हो उठी उन्मत्त मैं सखि आगमन लख नाथ का ,
आज मम मानस बिहारी हंस उड़ कर आयेंगे !
सखि आज प्रिय घर आयेंगे !


किरण

चित्र गूगल से साभार