सोमवार, 20 जून 2011

प्रेरणा

युग बदलता देख कवि तुम भी बदल दो भावनायें !

वेदना की ज्वाल जग में शान्ति का संदेश लाये ,
धधकती चिंता चिता बन राख जग में मुक्ति पाये ,
त्याग की दृढ़ भावना कवि हृदय की बहुमूल्य निधि हो ,
वज्र सा कर्तव्य पथ हो सुगम, दायें हाथ विधि हो ,
पा नया अवलंब पुष्पित पल्लवित हों कामनायें !
युग बदलता देख कवि तुम भी बदल दो भावनायें !

शून्य नभ में झिलमिलायें आश के स्वर्णिम सितारे ,
नयन सीपि के धवल मुक्ता दया करके पग पखारें ,
आपदाओं की लहरियों बीच पंकज सरसरायें ,
खिल उठें कवि हृदय, हों सुकुमार सुख की लालसायें ,
नित्य पलटें पृष्ठ जीवन का नया कवि कल्पनायें !
युग बदलता देख कवि तुम भी बदल दो भावनायें !

मधुर स्मृति गीत हर लें उर क्षतों की विषद् पीड़ा ,
अमर जीवन में विरह की एक होवे मिलन व्रीड़ा ,
जागरण की मधुर स्मृति स्वप्न में बन मूर्त आयें ,
विश्व की रंगीनियाँ उर पर न अब अधिकार पायें ,
दूर रह कर प्रिय करें स्वीकृत अकिंचन अर्चनायें !
युग बदलता देख कवि तुम भी बदल दो भावनायें !


किरण