गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

चल मन अपनी प्यास बुझाने !

चल मन अपनी प्यास बुझाने !
मानस सर के निर्मल जल में, निज जीवन के स्रोत मिलाने !
चल मन अपनी प्यास बुझाने !

मत बन चंचल तज जग वैभव,
मत इस सुख पर दीवाना बन,
क्षणभंगुर है यह जग, यह सुख,
क्षणभंगुर है जग का वैभव,
माया मृग से चंचल सपने, ले चल उसमें आज डुबाने !

चल मन अपनी प्यास बुझाने !

संकीर्ण पंथ है लक्ष्य दूर,
पग-पग पर कंटक जाल बिछे,
छू मत इन चंचल वृक्षों को,
अभिसिक्त मोह रूपी जल से,
चल मन इस पापी जीवन के, दागों को धो आज मिटाने !

चल मन अपनी प्यास बुझाने !

है प्यास प्यास कुछ और नहीं,
होतीं न तृप्त अभिलाषायें,
आशा के दीपक क्षीण पड़े,
छाईं घनघोर निराशायें,
अब यहाँ कौन आएगा रे मन, तुझको भूली राह बताने !

चल मन अपनी प्यास बुझाने !

वे पथ दर्शक तो चले गये,
उनकी कृतियों का आश्रय ले,
माया तृष्णा को त्याग अरे,
रीते घर में यह निधि भर ले,
यह मिथ्या जग इसका वैभव, ले चल दुःख पर आज लुटाने !

चल मन अपनी प्यास बुझाने !


किरण

17 टिप्‍पणियां:

  1. Bahut hee sundar tatha gey rachana!Kaash ise koyi gaa ke sunaye!

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  2. है प्यास प्यास कुछ और नहीं,
    होतीं न तृप्त अभिलाषायें,
    आशा के दीपक क्षीण पड़े,
    छाईं घनघोर निराशायें,
    अब यहाँ कौन आएगा रे मन, तुझको भूली राह बताने !

    बहुत ही आकर्षण और आह्वान है आपकी कविता में -
    मेरा मन चल पड़ा है आप के साथ -
    बधाई ..!!

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  3. • इस कविता में वैचारिक त्वरा की मौलिकता नई दिशा में सोचने को विवश करती है।

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  4. उनकी कृतियों का आश्रय ले,
    माया तृष्णा को त्याग अरे,
    रीते घर में यह निधि भर ले,
    यह मिथ्या जग इसका वैभव, ले चल दुःख पर आज लुटाने !
    चल मन अपनी प्यास बुझाने !

    बहुत ही गहन अभिव्यक्ति है...

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  5. आप की कविता बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती हे, बहुत गहरी बाते लिये, धन्यवाद

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  6. गहन भाव लिए कविता |भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
    आशा

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  7. बहुत ही बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  8. बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  9. philosophy ko kavita me bandhne ka kaam prakriti hi kar sakti hai. mera yah vichar aapne miththhya kar diya. sundar rachna jo seedhe anthsthal tak pahunchi. aabhar

    of vandan aapko or aapki kavya "saadhna" ko

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  10. वे पथ दर्शक तो चले गये,
    उनकी कृतियों का आश्रय ले,
    माया तृष्णा को त्याग अरे,
    रीते घर में यह निधि भर ले,
    यह मिथ्या जग इसका वैभव, ले चल दुःख पर आज लुटाने !

    चल मन अपनी प्यास बुझाने !...........

    जीवन दर्शन से परिपूर्ण भावपूर्ण सुंदर रचना के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  11. वे पथ दर्शक तो चले गये,
    उनकी कृतियों का आश्रय ले,
    माया तृष्णा को त्याग अरे,
    रीते घर में यह निधि भर ले,
    यह मिथ्या जग इसका वैभव, ले चल दुःख पर आज लुटाने !

    चल मन अपनी प्यास बुझाने !

    अति सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  12. माया तृष्णा को त्याग अरे,
    रीते घर में यह निधि भर ले...

    खूबसूरत सीख ...सुन्दर संदेशात्मक रचना

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  13. मत बन चंचल तज जग वैभव,
    मत इस सुख पर दीवाना बन,
    क्षणभंगुर है यह जग, यह सुख,
    क्षणभंगुर है जग का वैभव,
    माया मृग से चंचल सपने, ले चल उसमें आज डुबाने !

    बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  14. मत बन चंचल तज जग वैभव,
    मत इस सुख पर दीवाना बन,
    क्षणभंगुर है यह जग, यह सुख,
    क्षणभंगुर है जग का वैभव,
    भावपूर्ण सुंदर रचना के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  15. गहन भाव लिए कविता |भावपूर्ण अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

    जवाब देंहटाएं
  16. संकीर्ण पंथ है लक्ष्य दूर,
    पग-पग पर कंटक जाल बिछे,
    छू मत इन चंचल वृक्षों को,
    अभिसिक्त मोह रूपी जल से,
    चल मन इस पापी जीवन के, दागों को धो आज मिटाने !

    ....अति सुन्दर प्रस्तुति।

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