मंगलवार, 2 अगस्त 2011

आँधी आई


सारे जग में आँधी आई !
पृथ्वी के कण-कण से उठ कर
जड़ चेतन तक सबमें छाई !
जग जीवन में आँधी आई !

तरु से विलग हुए नव पल्लव
पुष्प गुच्छ सुन्दर सुकुमार ,
नन्हें-नन्हें फल डालों से
गिरे अधपके हो जग भार !
दीन झोंपड़ी से दावानल
की लपटें उठ-उठ छाईं !

जग जीवन में आँधी आई !

युवकों में छाया जोश नया
अरु जग में फ़ैली क्रान्ति बयार ,
गिरते हुए देश में फिर से
नयी शक्ति का था संचार !
आँधी बन कर क्रान्ति
नया संदेशा भारत में लाई !

जग जीवन में आँधी आई !

सूक्ष्म रूप से हृदय कुटी में
पहुँची ले उन्माद नया ,
भोलापन उसके संग में पड़
अपने हाथों गया छला !
आग लगा जीवन वन में
धर नया रूप आँधी आई !

सारे जग में आँधी आई ,
जग जीवन में आँधी छाई !


किरण

भारत में