शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

आ वसन्त ! खेलो होली !


मंथर गति से मलय पवन आ
सौरभ से नहला जाता ,
कुहू-कुहू करके कोकिल जब
मंगल गान सुना जाता !

हरित स्वर्ण श्रृंगार साज जब
अवनि उमंगित होती थी ,
स्वागत को ऋतुराज तुम्हारे
सुख स्वप्नों में खोती थी !

भर फूलों में रंग पराग के
कुमकुम से भर कर झोली ,
आते थे ऋतुराज खेलने
तुम प्रतिवर्ष यहाँ होली !

किन्तु आज आहों की ज्वाला
हृदय नीड़ को जला रही ,
निज पुत्रों के बलिदानों से
अब वसुधा तिलमिला रही !

अब न कोकिला के मृदु स्वर में
मंगलमय संगीत भरा ,
दुखिया दीन मलीन वेश में
प्रस्तुत है ऋतुराज धरा !

है दारिद्र्य देव का शासन
नंगे भूखों की टोली ,
दुखी जनों के हृदय रक्त से
आ वसन्त खेलो होली !


किरण




18 टिप्‍पणियां:

  1. kyaa bat hai jnab achchaa svaagt hai bhtrin jzbaat or alfaazon ke saath .akhtar khan akela kota rajsthan

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  2. ओह!! कविता की प्रथम पंक्तियाँ पढ़ते हुए जो मुस्कान फैली थी चेहरे पर अंतिम पंक्तिओं तक पहुँचते-पहुँचते तिरोहित हो गयी...
    सच ही तो है...आज कैसा वसंत और कैसी होली...:(

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  3. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  4. है दारिद्र्य देव का शासन
    नंगे भूखों की टोली ,
    दुखी जनों के हृदय रक्त से
    आ वसन्त खेलो होली !

    कितनी गहनता है इस रचना में ...माँ की कलाम को नमन

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  5. अब न कोकिला के मृदु स्वर में
    मंगलमय संगीत भरा ,
    दुखिया दीन मलीन वेश में
    प्रस्तुत है ऋतुराज धरा !
    सच है अब कुछ भी नहीं रहा ना वह उत्साह रहा है ना ही खुश है वसुंधरा... गहन भाव

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  6. किन्तु आज आहों की ज्वाला
    हृदय नीड़ को जला रही ,
    निज पुत्रों के बलिदानों से
    अब वसुधा तिलमिला रही !

    अब न कोकिला के मृदु स्वर में
    मंगलमय संगीत भरा ,
    दुखिया दीन मलीन वेश में
    प्रस्तुत है ऋतुराज धरा !...behtareen

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. है दारिद्र्य देव का शासन
    नंगे भूखों की टोली ,
    दुखी जनों के हृदय रक्त से
    आ वसन्त खेलो होली !

    -कितना सत्य....ओह!

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  9. समाज की मार्मिक दशा को प्रतिबिम्बित करती कविता..

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  10. कवि दृष्टी सचमुच कितनी चीजें देखती हैं...
    सुन्दर गीत...
    सादर.

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  11. है दारिद्र्य देव का शासन
    नंगे भूखों की टोली ,
    दुखी जनों के हृदय रक्त से
    आ वसन्त खेलो होली !
    सुन्दर प्रस्तुति .

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  12. पंक्तियों का कोई जवाब नहीं , अतिउत्तम काव्य न नमूना बधाई

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  13. bahut hi anupam rachanaa .bahut badhaai aapko.

    आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (३२) में शामिल किया गया है /आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप सबका आशीर्वाद और स्नेह इस मंच को हमेशा मिलता रहे यही कामना है /आभार /इस मीट का लिंक है
    http://hbfint.blogspot.in/2012/02/32-gayatri-mantra.html

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  14. समाज को आइना दिखाता आपका प्रवाहमय गीत ...

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  15. बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
    आशा

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