रविवार, 4 मार्च 2012

जीवन प्याली


मेरी जीवन प्याली दे
तू बूँद-बूँद भर साकी ,
परिपूरित कर दे कण-कण
रह जाये न खाली बाकी !

मैं ढूँढ-ढूँढ थक आई
साकी तेरी मधुशाला ,
दे दे भर-भर कर मुझको
मोहक प्याले पर प्याला !

मैं हो जाऊँ पी-पी कर
बेसुध पागल मतवाली ,
छा जावे इन अधरों पर
तेरे मधु की मृदु लाली !

ले अमिट साध यह साकी
मैं तेरे सम्मुख आई ,
इस हाला में जीवन की
सारी सुख शान्ति समाई !

दे साकी इतनी हाला
बेसुध होऊँ छक जाऊँ ,
बस एक बार ही पीकर
साकी अनंत तक जाऊँ !


किरण

चित्र गूगल से साभार