सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

वसंतागमन











आज नयनों में जीवन है !

दर्शन कर उस प्राण सखा का
पुलकित तन मन है !

आज नयनों में जीवन है !

आज कुसुमित उर की डाली ,
आज प्रमुदित मन का माली ,
आया नव वसन्त आज
मुकुलित यह उपवन है !

आज नयनों में जीवन है !

भाव अंकुर हैं फूट चले ,
मधुप सौरभ हैं लूट चले ,
आज लुटाता मृदु पराग
मलयानिल क्षण-क्षण है !

आज नयनों में जीवन है !

रंगीली आशा की कलियाँ ,
कर रहीं खिल-खिल रंगरलियाँ ,
आया उनके देश पाहुना
वह तो जीवन धन है !

आज नयनों में जीवन है !


किरण