सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

आई बहार आया वसन्त


फूली सरसों झूमी बालें, धरणी को फिर श्रृंगार मिला ,
छाई आमों पर तरुणाई, बौरों को मधु का प्यार मिला !

नव पादप झूम उठे साथी, कोकिल फिर तान लगी भरने ,
नव खिली कली को देख भ्रमर, फिर से मनुहार लगे करने !

कोमल किसलय के आँचल से, छाई वृक्षों पर हरियाई ,
चंचला प्रकृति के प्रांगण में, फिर आज बज उठी शहनाई !

फिर रक्त कुसुम खिलखिला उठे, टेसू ने वन में भरा रंग ,
कुसुमायुध लेकर आ पहुँचा, निज सखा सहित ऋतुपति अनंग !

सौरभ वितरित कर कुसुमों ने, कर दिये सुगन्धित दिग्दिगंत ,
सब जग हर्षित हो नाच उठा, आई बहार आया वसन्त !


किरण