शनिवार, 17 दिसंबर 2011

आशा

देव ! तुम्हारा ध्यान हृदय में कई बार आता ,
नयी इक ज्योति जगा जाता ,
मान का कमल खिला जाता ,
योजना नयी बना जाता ,
दे जाता है अहा हृदय को वह सांत्वना महान ,
भूल जाती हूँ दुःख अपमान !

निराशा होती जीवन में ,
दुःख हो जाता है मन में ,
रोग लग जाते हैं तन में ,
तेल घटता है क्षण-क्षण में ,
तभी शीघ्र आ जाता प्रियतम अहा तुम्हारा ध्यान ,
फूल उठता है हृदयोद्यान !


किरण