रविवार, 30 अक्तूबर 2011

चलो नया संसार बसायें


चलो नया संसार बसायें !
अवनी का कठोर अंचल तज
नभ में नव घर एक बनायें !
चलो नया संसार बसायें !

जहाँ तेरा मेरा कर यह
जग अपने को छले सखे ,
जहाँ चिंता चिनगारी से
यह अपना तन जले सखे ,
व्यर्थ जग की निष्ठुरता में
पड़ यह अपना अंग घुलायें !

चलो नया संसार बसायें !

जहाँ सुख-दुःख और
निराशा आशाओं के बंधन होवें ,
जहाँ औरों के फंदे में
फँस कर हम अपनापन खोवें ,
जहाँ अरमानों की आहुतियाँ
दे जीवन यज्ञ रचायें !

चलो नया संसार बसायें !

केवल जग के ऊपर निर्भर
जहाँ जीना मरना होगा ,
जहाँ उर में शान्ति तृप्ति
लाने को आँसू झरना होगा ,
और व्यर्थ हँसने रोने में
क्यों यह अपना समय गवाँयें !

चलो नया संसार बसायें !


किरण