रविवार, 4 मार्च 2012

जीवन प्याली


मेरी जीवन प्याली दे
तू बूँद-बूँद भर साकी ,
परिपूरित कर दे कण-कण
रह जाये न खाली बाकी !

मैं ढूँढ-ढूँढ थक आई
साकी तेरी मधुशाला ,
दे दे भर-भर कर मुझको
मोहक प्याले पर प्याला !

मैं हो जाऊँ पी-पी कर
बेसुध पागल मतवाली ,
छा जावे इन अधरों पर
तेरे मधु की मृदु लाली !

ले अमिट साध यह साकी
मैं तेरे सम्मुख आई ,
इस हाला में जीवन की
सारी सुख शान्ति समाई !

दे साकी इतनी हाला
बेसुध होऊँ छक जाऊँ ,
बस एक बार ही पीकर
साकी अनंत तक जाऊँ !


किरण

चित्र गूगल से साभार

15 टिप्‍पणियां:

  1. मन की सारी इच्छाओं को मादक मदिरा मिली रहे...

    जवाब देंहटाएं
  2. बढ़िया प्रस्तुति

    आभार ।।

    दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक

    dineshkidillagi.blogspot.com


    होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
    कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  4. मैं हो जाऊँ पी-पी कर
    बेसुध पागल मतवाली ,
    छा जावे इन अधरों पर
    तेरे मधु की मृदु लाली …………वाह कितना मधुर भाव है।

    जवाब देंहटाएं
  5. प्यार के रंगों से भरी लगी आपकी रचना....

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर ....
    होली की शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत उत्तम रचना :)
    होली की शुभकामनाएँ.....

    जवाब देंहटाएं
  8. aadarniya mosiji sadar vande , aap sabhi ko holi ki aseem shubhkamnayen.behad pyaari rachana hae.jivan men aek nsha jaroori hota hae.sarthak post hae aapki aabhar.

    जवाब देंहटाएं
  9. रंगोत्सव पर आपको सपरिवार बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  10. शानदार रसमय प्रस्तुति.
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    जवाब देंहटाएं