गुरुवार, 22 मार्च 2012

पंथी परदेसी


राह तुम्हारी दूर चले आये तुम पंथी भूले ,
हुए उदय कुछ पुण्य हमारे पद रज पा हम फूले !

स्नेह बिंदु कुछ इस मरुथल में आ तुमने बरसाये ,
ये सूखे जीवन तरु राही पा तुमको सरसाये !

स्वागत गान तुम्हारा गाती भ्रमरावलि की टोली ,
मृदु पराग से भर दी तुमने नव कुसुमों की झोली !

ओ परदेसी आज तुम्हें पा हमने सीखा पाना ,
जीवन की ममता माया को अब हमने पहचाना !

नदी किनारे बैठा चातक मरता आज तृषा से ,
पीड़ित धरा कोप से रवि की रह-रह भरे उसाँसे !

तुमने पिला मधुर वाणी रस उसके भाव जगाये ,
सरस स्वच्छ शबनम से आँसू धरिणी पर बरसाये !

ओ अनजाने राही कैसे स्वागत करें तुम्हारा ,
हृदय थाल में भाव दीप रख करें पंथ उजियारा !

पलक पाँवड़े बिछा दिए जा रखना याद हमारी ,
हमें तुम्हारी यह स्मृति निधि सारे जग से प्यारी !


किरण



22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भावमयी रचना ... माँ की हर रचना शिल्प में अद्भुत लगती है

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  2. स्वागत गान तुम्हारा गाती भ्रमरावलि की टोली ,
    मृदु पराग से भर दी तुमने नव कुसुमों की झोली !

    बहुत भावभीनी।

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  3. हुए उदय कुछ पुण्य हमारे पद-रज पा हम फूले !

    नव वर्ष की मंगल कामनाओं सहित आभार ||
    dineshkidillagi.blogspot.com

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  4. ओ अनजाने राही कैसे स्वागत करें तुम्हारा ,
    हृदय थाल में भाव दीप रख करें पंथ उजियारा !
    बहुत सुन्दर....

    आपको और सभी परिवार जनों को चैत्र नवरात्र और नव संवत की अनेकों मंगलकामनाएं.

    सादर.
    अनु

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  5. नदी किनारे बैठा चातक मरता आज तृषा से ,
    पीड़ित धरा कोप से रवि की रह-रह भरे उसाँसे !

    बहुत ही प्यारी रचना

    आप को सपरिवार नव संवत की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

    सादर

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  6. बहुत भावमयी रचना
    नव संवत्सर की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    आपको नव सम्वत्सर-2069 की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  8. स्नेह बिंदु कुछ इस मरुथल में आ तुमने बरसाये ,
    ये सूखे जीवन तरु राही पा तुमको सरसाये !

    चैत्र नवरात्र और नव संवत की अनेकों मंगलकामनाएं.....!

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  9. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण |
    आशा

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  10. नव संवत्सर का आरंभन सुख शांति समृद्धि का वाहक बने हार्दिक अभिनन्दन नव वर्ष की मंगल शुभकामनायें/ सुन्दर प्रेरक भाव में रचना बधाईयाँ जी /

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  11. कभी लगे हम भी परदेशी, इस दुनिया में।

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  12. राह तुम्हारी दूर चले आये तुम पंथी भूले ,
    हुए उदय कुछ पुण्य हमारे "पद राज" पा हम फूले !

    बहुत सुंदर गीत.... पद राज...?? संभवतः “पद-रज” होगा...
    सादर।

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  13. स्नेह बिंदु कुछ इस मरुथल में आ तुमने बरसाये ,
    ये सूखे जीवन तरु राही पा तुमको सरसाये !
    बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  14. आभार आपका संजय जी टाइपिंग की त्रुटि की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए ! अभी सुधार लेती हूँ ! वहाँ 'पद रज' ही है !

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  15. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्‍तुति...

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  16. माँ की रचनाओं को जिस प्यार से हम लोगों को आप पढ़ा रही हें इसके लिए आभार. बहुत सुंदर भावपूर्ण कृति है.

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  17. तुमने पिला मधुर वाणी रस उसके भाव जगाये ,
    सरस स्वच्छ शबनम से आँसू धरिणी पर बरसाये ..

    बहुत ही सुन्दर भावमय कृति ...

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  18. पलक पाँवड़े बिछा दिए जा रखना याद हमारी ,
    हमें तुम्हारी यह स्मृति निधि सारे जग से प्यारी !

    bahut hi achchi prastuti

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