रविवार, 29 अप्रैल 2012

परियों का प्यार

स्वर्गलोक से परियाँ आयीं किरण नसैनी से होकर ,
नन्हे पौधों को नहलाया ओस परी ने खुश होकर ! 

फूलपरी ने आ उन सबका फूलों से श्रृंगार किया ,
सोई  कली जगाईं, पलकें चूम बहुत सा प्यार दिया ! 

फिर  सुगंध की परियाँ कलसे भर-भर कर पराग लाईं ,
नन्हे पौधों को सौरभ की भर-भर प्याली पकड़ाईं !    

देख सूर्य का तेज लाज से सकुचा कर सब भाग गईं ,
खेल  खेलने फूलों के संग तितली भँवरे चले कई !

बच्चों पौधों जैसे यदि उपकारी तुम बन जाओगे ,
वीर जवाहर, बापू से बन जग में नाम कमाओगे ! 

तो यह ही सब परियाँ आकर तुम पर प्यार लुटायेंगी ,
जग में फूलों की सुगंध सी कीर्ति तुम्हारी गायेंगी ! 

नाम तुम्हारा अमर रहेगा सब तुमको दुलरायेंगे ,
'ये हैं सच्चे लाल हिंद के' , कह जन मन सुख पायेंगे ! 


किरण