बुधवार, 25 जनवरी 2012

नव वसन्त आया


सखी री नव वसन्त आया !

आदि पुरुष ने धरा वधू पर पिचकारी मारी ,
नीले पीले हरे रंग से रंग दी रे सारी ,
अरुण उषा से ले गुलाल मुखड़े पर बिखराया ,
वह सकुचाई संध्या के मिस अंग-अंग भरमाया !

सखी री नव वसन्त आया !

रति की चरणाकृति पाटल किंशुक मिस मुस्काई ,
वन-वन उपवन नगर डगर में सुषमा इठलाई ,
रंग बिरंगी कुसुम प्यालियों को ला फैलाया ,
चतुर चितेरा प्रकृति पटल पर चित्र सजा लाया !

सखी री नव वसन्त आया !

सरस्वती ने निज वीणा को फिर से झनकारा ,
कोकिल की मृदु स्वर लहरी से गूँजा जग सारा ,
राग बहार यहाँ पर आकर ऐसा बौराया ,
फीकी पड़ी कीर्ति तब जब कोकिल ने गाया !

सखी री नव वसन्त आया !


किरण